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स्कालरशिप पोलिसी

धन आभाव के कारण शिक्षा लेने में असमर्थ छात्रों हेतु निम्न पालिसी के अंतर्गत स्कोलरशिप व लोन देने कि व्यवस्था है |

स्कालरशिप पोलिसी

  • स्कॉलरशिप कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12 तक दिए जाएंगे
  • स्कॉलरशिप केवल नगर निगम कन्या विद्यालय और लालचंद स्कूल के विद्यार्थियों को ही दिए जाएगे
  • स्कॉलरशिप केवल उन्हीं विद्यार्थियों को दिए जाएंगे जिनके माता.पिता रिक्शा चालक मजदूरी ठेला लगाने का कार्य इत्यादि करते हो या जिनके माता.पिता की मासिक आय ₹10000 से अधिक न हो
  • स्कॉलरशिप ऐसे बच्चों को नहीं दिया जाएगा जिनके माता पिता की अपनी दुकान हो या वेतन से आए ₹10000 प्रति माह से अधिक हो
  • प्रत्येक कक्षा के बाद एक परीक्षा आयोजित की जाएगी और जिन बच्चों के 80ः से ऊपर नंबर आएंगे वहीं स्कॉलरशिप के पात्र होंगे या 5 सबसे अधिक नंबर प्राप्त करने वाले बच्चों को दिए जाएंगे
  • स्कॉलरशिप 1 वर्ष के लिए दिया जाएगा
  • स्कॉलरशिप चेक स्कूल के खाते में सीधा जमा कराया जाएगा

शिक्षा लोन पोलिसी

  • सोसाइटी का कोई भी सदस्य छात्र ध्छात्रा का नाम संरक्षकए अध्यक्ष अथवा सचिव को अनुमोदित कर सकता है।
  • प्रपोजल लेकर आने वाले सदस्य की जिम्मेदारी होगी की तय किए गए निश्चित समय पर ऋण वापस आए।
  • तय समय पर यदि धनराशि वापस नहीं आती है तो प्रपोजल लाने वाले को इस धनराशि को तय समय पर ही चुकाना होगा।
  • जितनी धनराशि की जरूरत बच्चे को होगी उसका कम से कम 20 परसेंट का भुगतान प्रपोजल लाने वाले को करना होगा।
  • कम से कम 10 परसेंट का भुगतान स्वयं विद्यार्थी के परिवार को करना होगा।
  • शेष धनराशि की व्यवस्था प्रपोजल लाने वाला सदस्य अन्य सदस्यों से उनकी इच्छा अनुसार कर सकता है।
  • परिवार व बच्चे का नाम पूणतः गोपनीय रखा जाएगा।
  • दिए जाने वाले लोन की सोसाइटी की कोई गारंटी नहीं होगी। अनुमोदन कर्ता ही ऋण चुकाने के लिए उत्तरदायी होगा।
  • यह योजना सिर्फ उच्च शिक्षा हेतु ही लागू होगी ।
  • लोन की राशि सीधे इंस्टिट्यूट अथवा स्कूल को दी जाएगी तथा आवेदन कर्ता को उसकी रसीद की कॉपी सोसाइटी में जमा करानी होगी
  •    8 /1 , सेक्टर-३, राजेन्द्र नगर, साहिबाबाद
         ए० के० चिल्ड्रन एकेडमी, गाज़ियाबाद
  •   +91 9711233666
  •   rajkumarigupta.mcs@gmail.com

About Society

प्राचीन परम्परानुसार गाँव/क्षेत्रा के लोग परिवार के साथ सहयोग कर विवाह कार्यक्रम सम्पन्न कराया करते थे । कालान्तर में यह भावना क्षीण होती गयी और सहयोग, उत्साह/स्वेच्छा से न होकर, दबाव से हो गया ।


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