30 अक्टूबर 2009 को श्री अरूण गुप्ता की पुत्री आस्था का विवाह आप सबके आशीर्वाद से हुआ उन्होंने इस अवसर पर अनुरोध किया कि कृपया गिफट आदि न देकर केवल बच्चों को आशीर्वाद दें । उनका मानना था कि प्राचीन काल में विवाह एक सामाजिक दायित्व होता था जिसमें विवाह में समाज के सभी व्यक्ति अपनी-अपनी क्षमतानुसार शारीरिक व मानसिक सहयोग स्वेच्छा से उत्साहपूर्वक करते थे किन्तु कालांतर में इसका स्वरूप स्वेच्छा से न होकर परिस्थितिवश/दबाव में हो गया जो उचित प्रतीत नहीं होता ।
इसके अतिरिक्त हमारा मानना है कि बेटी का विवाह ‘वसुध्ेव-कटुम्बकम्’ की भावना से समाज की सांझी जिम्मेदारी है । यदि समाज के किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति बेटी का विवाह सम्पन्न करने की नही है तब समाज के सम्पन्न वर्ग का पुनीत दायित्व है कि उस विवाह में अपनी क्षमतानुसार सहयोग करें ।
इस दृष्टि से परिवार में निर्णय लिया कि आस्था की शादी की वर्षगांठ पर 4 बेटियों, जिनके माता पिता के आर्थिक स्थिति बेटी के हाथ पीले करने की न हो उनके विवाह का आयोजन (प्रथम सरल सामूहिक विवाह) दिनांक 02 दिसम्बर 2012 को किया गया। अब तक 6 कार्यक्रमांे में 30 बेटियों का विवाह हो चुका है।