About Us

मान्यताएं

  • धनाभाव के कारण, माता पिता बेटी के विवाह की आर्थिक व्यवस्था न कर पायें अथवा मेघावी बच्चा शिक्षा से वंचित रहे यह दुर्भाग्यपूर्ण है इस दृष्टि से, समाज का समपन्न वर्ग, वसुदेव कुटुम्बकम की भावना से प्रेरित होकर, साधनहीन व अभावग्रस्त परिवारों के शादी-विवाह बच्चों की शिक्षा व अन्य प्रतिभाओं/कौशल उचित अवसर प्रदान करने हेतू यथाशक्ति सहयोग प्रदान करें।
  • केवल अपने अधिकार /स्वार्थ की चिन्ता न कर, समाज के अभाव ग्रस्त/वंचित वर्ग के अधिकारों के प्रति भी संवेदनशील/चिन्तित हों।
  • महत्वपूर्ण जन सेवार्थ (विशेषकर आर्थिक विषमताओं वाले बन्धुओं के लिए) कार्य है ना कि आयोजक संस्था। अतः महत्वपूर्ण ये है हम इन बन्धुआंे की चिन्ता/सहयोग, सेवा/परोपकार की भावना से ना कर, दायित्व/कत्र्तव्यांे की भावना से करते हुये विशेषाधिकार की अपेक्षा न करंे। अतः जनसेवा करने वाले सभी व्यक्ति/संस्थायें अपनी सोसाइटी के सामान ही महत्वपूर्ण है।
  • सामाजिक संस्थाओं में प्रचलित पद, मंच, माल्यार्पण आदि की व्यवस्था में विश्वास नही करते। संचालन की व्यवस्था को सुचारू करने के लिये पद के स्थान पर दायित्व देने की व्यवस्था है। हमारा नियम है कि कोई भी दायित्वधारी इसका उपयोग सोसाईटी के अतिरिक्त (सामाजिक अथवा राजनैतिक क्षेत्र में) नही कर सकता।


कार्यकारिणी/दायित्वणारियों का गठन/चयन

संरक्षक व दायित्वधारियों के साथ साथ प्रत्येक प्रकल्प के संयोजक व प्रभारी, कार्यकारिणी के सदस्य होंगें। प्रकल्प के सह प्रभारी / सक्रिय सदस्य कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे।

 

प्रकल्प के प्रभारी/सक्रिय सदस्यों को सोसाईटी का सदस्य बनने हेतू आंमत्रित किया जायेगा उनकी सहमति मिलने के पश्चाात द्विवार्षिक/आजीवन सदस्य बनाया जायेगा।

 

सोसाईटी के उपाध्यक्ष, सह-सचिव व सह-कोषाध्यक्ष का चयन इस अपेक्षा से किया जायेगा कि वह अगामी सत्र में क्रमशः अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष के दायित्व को ग्रहण कर सके।

 

अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष के चयन हेतू चुनाव अधिकारी का मनोनयन इस अपेक्षा से किया जायेगा कि सर्वप्रथम उपरोक्त दायित्व का चयन सर्वसम्मति से किया जा सके। ऐसा न होने पर, चुनाव प्रक्रिया का पालन किया जायेगा। सत्र दो वर्ष का होगा। चयन की प्रक्रिया सत्र से पूर्व 28 फरवरी तक पूर्ण की जाने की व्यवस्था है।

  •    8 /1 , सेक्टर-३, राजेन्द्र नगर, साहिबाबाद
         ए० के० चिल्ड्रन एकेडमी, गाज़ियाबाद
  •   +91 9711233666
  •   rajkumarigupta.mcs@gmail.com

About Society

प्राचीन परम्परानुसार गाँव/क्षेत्रा के लोग परिवार के साथ सहयोग कर विवाह कार्यक्रम सम्पन्न कराया करते थे । कालान्तर में यह भावना क्षीण होती गयी और सहयोग, उत्साह/स्वेच्छा से न होकर, दबाव से हो गया ।


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